Saturday, February 25, 2017

उत्तराखण्ड में दो राजधानी हैं, तो दो राज्य क्यों नहीं ?















उत्तराखण्ड में दो राजधानी हैं, तो दो राज्य क्यों नहीं ?
“पहाड़ी राज हो ! कुमाउनी - गढ़वाली भाषा हो ! सब कुमाऊँनी -गढ़वाली बोलें ! गैरसैण राजधानी हो !  यही था स्वपना ! पर अफ़सोस !  नेताओं का तराई, हरिद्वार का लालच ले डूबा पहाड़ी राज को ! अब कहाँ है पहाड़ी राज ?
मेरी फेसबुक की इस पोस्ट के उत्तर में मुझे बहुत सारे कमेंट्स आये ! लोगों से उत्तर प्रत्युत्तर के पश्चात मैं आप सबकी राय जानना चाहता हूँ - क्या इन प्रश्नों का समाधान नीचे लिखे शब्दों में हो सकता है ? प्रश्न है उत्तराखण्ड में दो - दो राजधानी क्यों बनाई गई हैं ? स्पस्ट है राजनेताओं के मन मैं कहीं न कहीं मैदानी और पर्वतीय क्षेत्र में राजधानी की बात होगी ! अन्यथा दो-दो राजधानी का क्या औचित्य ? क्यों केंद्र सरकार एक और राजधानी के लिए वित्त उपलब्ध करा रही है ? प्रश्न है केंद्र के मन में क्या है ? जबकि जिलों के  निर्माण  के लिए सरकार वित्त न होने का बहाना बनाती है !                                                   सरकार भी  पलायन के मुद्दे का हल चाहती है ! पलायन रोकने के लिए गैरसैंण का राजधानी बनाना अत्यंत आवश्यक एवं अनिवार्य  है !  गैरसैण राजधानी बनने से पलायन की समस्या समाप्त हो सकेगी ! उल्टा पर्वतीय अंचल को पलायन प्रारंभ हो जायेगा l  रोजगार स्रजन होगा तो लोग अपने घरों को वापस आने लगेंगे ! युवाओं की बेरोजगारी कम होगी !  पलायन रोकना इसलिए भी आवश्यकीय है क्योंकि हमारी सरहदों पर दुश्मन देश लगातार घात लगाए रहते हैं ! वर्तमान में लोग पहाड़ छोड़ रहे है, यदि लोग इसी तरह पलायन करते रहे  ! तो पहाड़ खाली हो जायेंगे और दुश्मनों की गतिविधियों का हमें पता भी नहीं चलेगा ! अतः उलटा पहाड़ों की ओर पलायन  आवश्यकीय है ! हमने एक हल  पेस किया है ! इसमें एक मत बने और कोई भी राजनैतिक दल इसे अपने अजेंडे में शामिल करे तो देर सबेर यह कार्य तो होना  ही है ! प्रश्न यह भी है कि उत्तराखण्ड के पर्वतीय अंचल का  विकास क्यों नहीं हुवा ! जब उत्तराखण्ड आन्दोलन चरम पर था मेरी वार्ता उत्तराखन्ड क्रांति के शीर्ष नेता काशी  सिंह ऐरी से हुई ! मैंने उनसे कहा हरिद्वार एवं उधमसिंह नगर का मोह छोडिये ! यदि यह जिले उत्तराखण्ड में  मिलेंगे तो पर्वतीय राज्य की अवधारण ही समाप्त हो जायेगी ! उन्होंने तर्क दिया कि राज्य को आर्थिक रूप शसक्त बनाने हेतु यह आवश्यकीय है ! फिर हरिद्वार तो हरि का द्वार है ! और उधमसिंह नगर पहाड़ का आँगन ! इसलिए यह आवश्यकीय है !  मैंने कहा कि तब तो विकास हरिद्वार उधमसिंह नगर का ही होगा क्योंकि तो घर के अन्दर नहीं हो सकता ! यह तो द्वार के बाहर और आँगन में ही हो सकता है ! परन्तु वह नहीं माने ! मैंने स्वर्गीय बिपिन चंद्र त्रिपाठी से भी बात की ! त्रिपाठी मेरे साथ जीवन बीमा निगम के एजेंट के रूप मैं कार्य करते थे ! इसलिए मैंने उक्त बातें बड़े हक़ से कही ! पर उन्होंने बताया कि यह फैसला हमारे शीर्ष स्तर पर हो चुका है अतः यह संभव नहीं है ! फिर भी उन्होंने इस बात की चर्चा हेतु वायदा किया ! आज मेरी यह बात अक्षरशः सत्य हो रही है !  हरीश रावत चाहते थे कि उत्तराखण्ड केंद्र शासित राज्य बने ! जिससे कि इसकी आर्थिकी मजबूत हो सके और इसका विकास योजना बद्ध तरीके से हो सकती ! केंद्र स्तर से इसकी घोषणा की भी तैयारी हो चुकी थी ! परन्तु विभिन्न दलों के विरोध के कारण  यह नहीं हो सका ! और आज लोग उत्तराखण्ड केंद्र शासित राज्य की मांग फिर से उठा रहे हैं ! परन्तु अब पानी सर से ऊपर आ गया  है ! अब नए राज्य की मांग के विषय में समस्त पर्वतीय जनों को सोचना होगा अन्यथा अगले कुछ परिसीमानों के पश्चात हमारे विधायकों की संख्या नगण्य होती जायेगी  और हम कहीं के नहीं रहेंगे !                                                                                                              राजधानी कहाँ होगी यह प्रश्न आज 16 साल बाद भी हल नहीं हो पाया है l इसलिए इसका हल दो राज्यों के निर्माण से ही  हो सकता है ! अतः  पर्वतीय राज्य का नाम हो सकता है देवभूमि उत्तराखण्डक्योंकि देवभूमि पर्वतीय अंचल को ही कहते हैं, खास तौर पर गढ़वाल को !  मैदानी क्षेत्र को नहीं ! इसलिए मैदानी राज्य का नाम उत्तराखण्ड हो सकता है !
राजधानी गैरसैण में काफी निर्माण कार्य हो चुका है  ! 10-15 साल के लिए नया  राज्य  केंद्र शासित राज्य होना चाहिए  ! मैदानी क्षेत्र की राजधानी  देहरादून है और रहेगी ! एक सुझाव यह भी मिला था कि मैदानी इलाके को  हरित प्रदेश में शामिल  किया जाय, जिस पर जनता की राय ली जा सकती है l                                                              कुछ लोग कह रहे हैं यह सब कुछ नहीं हो सकता ! मैं इस बात को मानता हूँ ! पर यह एक विचार है ! जब विचार जन्म लेता है तो कोई न कोई उस विचार को कभी न कभी ग्रहण कर लेता है ! इसे कार्यरूप में कौन परिणित करता है, करता है भी नहीं यह समय बताएगा ? इस समय मैदानी क्षेत्र के पहाड़ी गैरसैण राजधानी के पूर्णतया  खिलाफ हैं जब कि कुमायूं के पहाड़ी क्षेत्र के लोग राजधानी देहरादून से परेशान हैं ! प्रश्न है फिर दो राजधानी क्यों बनाई गई ? स्पष्ट है एक मैदान के लिए ही और एक पहाड़ के लिए ! कब तक हम राजधानी के मुद्दे पर लड़ते रहेंगे  ? यह कटु सत्य है गैरसैण राजधानी नहीं हो सकती ! जब असाम में छोटे छोटे 7 राज्य बन सकते हैं तो उत्तराखण्ड में दो राज्य क्यों नहीं बन सकते ? अतः हमें प्रयास करना होगा !                                                                           संलग्न है गैरसैण के 22 फोटो !

डी एन बड़ोला DN Barola, रानीखेत l सम्पर्क : 9412909980