Wednesday, April 5, 2017

Hill Development Board at Gairsen is the need of the hour for developing hills.


पर्वतीय अंचल के विकास हेतु गैरसैण में पर्वतीय विकास परिषद का गठन किया जाय – बड़ोला रानीखेत प्रेस क्लब के अध्यक्ष डीएन बड़ोला ने उत्तराखण्ड के नव निर्वाचित मुख्य मंत्री त्रिवेंद्र रावत को उत्तरखण्ड राज्य के नए मुख्य मंत्री बनने के अवसर पर बधाई दी है ! उन्होंने एक पत्र के माध्यम से मुख्य मंत्री को पर्वतीय की वर्तमान समस्याओं के विषय में लिखा है कि पहाड़ से पलायन की गति बढ़ती जा रही है ! रोजगार, शिक्षा, बंदरों व अन्य जानवरों के आतंक से लोग परेशान होकर पहाड़ छोड़ रहे हैं ! यह पलायन अधिकतर उत्तराखण्ड के मैदानी क्षेत्रों को हो रहा है ! प्रश्न है यह कैसे बंद हो ? 16 साल से यह पलायन अनवरत जारी है पर कोई भी सरकार कुछ भी नहीं कर पा रही है ! जनसंख्या घटने से हमारे विधायक 40 के बजाय 30 रह गए हैं ! हर परिसीमन के साथ यह संख्या घटती जायेगी ! पहाड़ से जो पहाड़ी मैदानी क्षेत्रों को पलायन करते हैं वह पहाड़ वापस नहीं आना चाहते ! उन्हें किच्छा, सितारगंज पसंद है भीमताल, नैनीताल नहीं ! उनका इसमें कोई कसूर नहीं है ! उन्हें वहाँ ज्यादा सुविधा है इसलिए वह वहाँ रहना चाहते हैं ! प्रकृति ने इन दोनों स्थानों के लिए भिन्न भिन्न स्थितियां बनाई है ! ऐसे में इसका एक ही हल है l यदि नई सरकार पहाड़ के विकास के लिए वास्तव में प्रतिबद्ध है तो लद्दाख की तर्ज पर गैरसैंण में पर्वतीय विकास परिषद् का गठन किया जाय ! यदि पहाड़ी क्षेत्र को एक अलग इकाई के रूप में विकसित किया जाय तो पहाड़ की समस्याओं का समाधान हो सकता है ! इस अलग इकाई का कार्यालय का संचालन गैरसैण से हो ! इसक बजट भी अलग हो ! इसके कर्मचारियों को पर्वतीय अंचल में ही रहना होगा ! परन्तु यह होगा उत्तराखण्ड के ही अधीन ! मैं समझता हूँ तब ही यह स्वपोषित राज्य बन सकेगा ! क्योंकि पहाड़ में पर्यटन व्यवसाय, बागवानी, जड़ी बूटी के दोहन आदि की अपार संभावनाएं हैं ! अकेला पर्यटन ही हमें स्वपोषित राज्य बना देगा ! यदि मैदानी क्षेत्र की आबादी एक हद से ज्यादा बढ़ती गई तो मैदानी क्षेत्र मैं नई नई समस्याएँ पैदा होंगी ! इसलिए मैदानी क्षेत्रों के हित में भी पहाड़ से मैदानी क्षेत्र को पलायन रोकना आवश्यकीय होगा ! विभिन्न भोगोलिक संरचना के कारण दोनों क्षेत्रों के विकास में भी भिन्नता होगी ! पर्वतीय पर्यटन बढ़ने से मैदानी क्षेत्र को भी लाभ होगा ! बागवानी एवं जड़ी बूटी की मार्केटिंग भी तो मैदानी क्षेत्र में ही होगी ! इस सच को देर सबेर लोग स्वीकार करेंगे कि दो विभिन्न भोगोलिक क्षेत्रों के लिए दो इकाई समय की आवश्यकता है ! पहाड़ी राज्य को मैदानी क्षेत्र से मिलाकर पहाड़ का विकास करने की योजना फेल हो चुकी है ! इसलिए मेरे इस विचार पर गहन मंथन करना

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