[5:35 PM, 3/31/2017] +91 94129 09980: Apoorva Joshi सम्पादक ने एक लिखा है जो आपके अवलोकनार्थ प्रेषित है ! इसमें सबसे नीचे मैंने 2 कमेंट भी दिए है ! एक खत मुख्यमंत्री के नाम
प्रिय त्रिवेंद्र जी,
भारतीय जनता पार्टी प्रचंड बहुमत के साथ उत्तर प्रदेश और उत्तराखण्ड में सत्तासीन हो चुकी है। ऐसा बहुमत अपेक्षित नहीं था। न उत्तर प्रदेश में, न ही उत्तराखण्ड में। उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की सरकार ने कई ऐसे कामों को अंजाम तक पहुंचाया था जिनके बल पर वह सत्ता वापसी के प्रति आश्वस्त थे। इसी प्रकार विजय बहुगुणा के विवादित कार्यकाल के बाद हरीश रावत सरकार एक काम करने वाली सरकार रही। रावत ने केदारनाथ में युद्ध स्तर पर पुर्ननिर्माण के कार्य कराए। पहाड़ से पलायन रोकने, आम आदमी को स्वास्थ्य संबंधी बीमा उपलब्ध कराने, पहाड़ी उत्पादों को बाजार मुहैया कराने से लेकर अनेक ऐसे कार्य हैं जिनका श्रेय रावत को दिया जाना चाहिए। इस सबके बावजूद अखिलेश और हरीश के नेतृत्व में सपा- कांग्रेस को भारी पराजय का मुंह यदि देखना पड़ा तो इसके पीछे जरूर कुछ ऐसे महत्वपूर्ण कारण रहे होंगे जिन्होंने जनता को मजबूर किया होगा कि वे इन दोनों को नकार भाजपा के नेतृत्व में आस्था प्रकट करे। चलिए प्रयास करते हैं उत्तराखण्ड में कांग्रेस की हार के पीछे रहे कुछेक महत्वपूर्ण कारणों को समझने का। साथ ही इस भारी जनादेश के बाद आपकी सरकार पर आन पड़ी इस जिम्मेदारी की भी जो आपको उत्तराखण्ड की जनता ने बहुत विश्वास के साथ सौंपी है।
सबसे पहले तो मैं ईवीएम मशीन के चमत्कार की कहानियों पर अपना अविश्वास सामने रखता हूं। यह सही है कि इन मशीनों पर छेड़छाड़ संभव है। बहुत से तरीके हैं जिनके जरिए मशीन को टेंपर यानी छेड़ा जा सकता है। लेकिन इतने बड़े पैमाने पर ऐसा हो पाना संभव प्रतीत नहीं होता। निश्चित ही यह नरेंद्र मोदी के प्रति जनता के भरोसे का नतीजा है कि भाजपा उप्र और उत्तराखण्ड में इतने बड़े बहुमत को पा पाने में सफल रही है। साथ ही यह जीत उस परसेप्शन के चलते भी हुई है जो हरीश रावत सरकार को भ्रष्ट सरकार की छवि दे पाने में सफल रहा। अथक परिश्रम करने वाले सीएम की छवि के बावजूद हरीश रावत अवैध खनन और शराब माफिया संग अपनी सरकार के गहरे रिश्तों के आरोपों से बाहर निकल पाने में विफल रहे। इसके पीछे एक बड़ा कारण उनके कुछेक करीबी साथियों का आचरण रहा जिनका खामियाजा अंततः कांग्रेस को करारी पराजय के रूप में भुगतना पड़ा। मुख्यमंत्री रहते हरीश रावत को अक्सर अपने इन सहयोगियों के दबाव के चलते कई ऐसे निर्णय लेने पड़े जिन्होंने जनता के मध्य उनकी छवि को प्रभावित करने का काम किया। दूसरा बड़ा कारण सरकार और संगठन के बीच तालमेल का अभाव रहा। पार्टी अध्यक्ष किशोर उपाध्याय अपनी ही सरकार के खिलाफ काम करते दिखे। किशोर की नाराजगी सरकार से कम हरीश रावत संग ज्यादा थी। किशोर को पूरा विश्वास था कि हरीश रावत उन्हें राज्यसभा भेजे जाने के लिए आलाकमान को तैयार कर लेंगे। हुआ इसके ठीक उलट। रावत ने अपने करीबी प्रदीप टम्टा को राज्यसभा भेज किशोर के राजनीतिक भविष्य की नींव हिलाने का काम किया। इससे आहत किशोर पूरी तरह बगावत पर उतर आए। टिहरी सीट से टिकट पाने की उनकी कोशिश भी नाकाम हो गई। हरीश रावत ने उनके बजाय निर्दलीय दिनेश धन्नै को तरजीह दी। एक अन्य बड़ा कारण सरकार का अस्थिर रहना रहा। हरीश रावत चाहकर भी कई ऐसे फैसले नहीं ले पाए जिनका सीधा असर उनके साथियों के भ्रष्ट आचरण से था। रावत सरकार के मंत्री अपनी पसंद के अफसरों को तबादला कराने से लेकर निर्माण कार्यों के टेंडरों को मैनेज करने के लिए सुर्खियों में बने रहे। इससे सरकार की छवि खासी प्रभावित हुई। नतीजा जनता ने एकतरफा भाजपा को वोट देकर रावत सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया। न केवल गढ़वाल, बल्कि तराई और कुमाऊं जो हरीश रावत का गढ़ माना जाता रहा है। इसके बावजूद जनता ने यदि भाजपा को जिताया तो निश्चित ही इसके पीछे सबसे बड़ा कारण हरीश रावत सरकार के प्रति जनता का आक्रोश रहा जिसे समझ पाने में न केवल कांग्र्रेस, बल्कि सभी राजनीतिक पंडित भी विफल रहे। जाहिर है जिस प्रचंड बहुमत से भाजपा उत्तराखण्ड में सत्ता में आई है, उतनी ही प्रचंड जनापेक्षाओं का दबाव भी उसके ऊपर है। आपकी प्रशासनिक क्षमताओं को परखा जाना अभी बाकी है। आपने पिछली सरकार के कार्यकाल में हुए घोटालों पर सख्ती बरतने का इशारा अपने पहले ही निर्णय से कर दिया है। एनएच 74 जमीन घोटाले की सीबीआई जांच का आदेश दे आपने स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि आपकी सरकार भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं करेगी। संकट लेकिन यह है कि आपके मंत्रिमंडल में शामिल अनेक मंत्रियों की छवि दागी है। कांग्रेस से भाजपा में गए हरक सिंह रावत पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगते रहे हैं। स्वयं भाजपा उन पर हमेशा आक्रामक रही है। पहली बार राज्यमंत्री बनी रेखा आर्य अपने पति के चलते विवादों में रही हैं। आर्य के पति पर कई आपराधिक मामले उत्तर प्रदेश में दर्ज हैं। दिल्ली सरकार में आर्य के पति को सीएम हरीश रावत के आस-पास देखा जाता था। अब आपके संग भी उनकी तस्वीरें देखने को मिल रही हैं। इससे शंका पैदा होती है कि आपकी सरकार वाकई भ्रष्टाचार और अपराध जैसे संवेदनशील मुद्दों पर कुछ सकारात्मक कर पाएगी। यहां यह भी हमें याद रखना होगा कि भाजपा की पिछली सरकारों में भारी भ्रष्टाचार देखने को मिला था। जनरल खण्डूड़ी की सरकार में सीएम के प्रमुख सचिव सारंगी पर गंभीर आरोप लगे थे। हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट में भारी लेन-देन की बात तब सामने आई थी। बाद में डाॅ . निशंक की सरकार को भी नाना प्रकार के भ्रष्टाचार के आरोपों से जूझना पड़ा था। सिटुरजिया जमीन घोटाले में तो उच्च न्यायालय नैनीताल ने राज्य के अफसरों पर कठोर टिप्पणी तक की थी। ऐसे में प्रश्न उठना, आशंका उठनी लाजिमी है कि क्या मात्र चेहरा बदल जाने से सब कुछ ठीक हो सकता है। नौकरशाह वही,
राजनीतिक संगी-साथी वही, तब आप कैसे एक स्वच्छ सरकार दे सकेंगे।
बहरहाल इन प्रश्नों के उत्तर भविष्य के गर्भ में हैं। इसलिए अभी से आशंकित होने की बजाय जरूरत है आपको थोड़ा वक्त देने की। जरूरत है आपकी कार्यशैली को समझने की। हो सकता है आपके रूप में हमें यशवंत परमार सरीखा मुख्यमंत्री मिल गया हो जो उत्तराखण्ड की दशा और दिशा दोनों को बदलने की कुव्वत रखता हो। कम से कम हम यह सद्इच्छा तो रख ही सकते हैं।
त्रिवेंद्र जी समस्त उत्तराखण्ड वासियों की तरफ से मैं आपसे कहना चाहता हूं कि आप एक कठिन दौर में राज्य के मुखिया बने हैं। एक ऐसी व्यवस्था आप को विरासत में मिली है जिसे पूरी तरह दीमकों ने खोखला कर दिया है। आप पर इसलिए बहुत बड़ा दायित्व है इसे बिखरने न देने का। आप का मार्ग बेहद कठिन है। इसमें फूल गिनती के हैं, कांटे चारों तरफ असंख्य बिखरे पड़े हैं। आपके समक्ष अपने साथियों की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं का भारी दबाव रहेगा। कहीं ऐसा न हो आप भी अपने पूर्ववर्तियों की भांति थोक में लालबत्ती बांटने को विवश हो जाएं। मैं आपको अमेरिका के चैतीसवें राष्ट्रपति आइजनहाॅवर का कथन याद दिलाना चाहूंगा - “The supreme quality of leadership is unquestionable integrity. Without it, no real success is possible, no matter whether it is on a section gang, football field, in an army, or in an office”. अब यह आप के ऊपर है कि आप इतिहास में स्वयं को कैसे दर्ज कराना चाहते हैं। हम तो आपके लिए केवल सद्इच्छा और शुभकामनाएं दे सकते हैं। आपकी ताजपोशी उत्तराखण्ड के लिए स्वर्णिमकाल हो ऐसी उम्मीद के साथ आपको गुरूवर रविंद्रनाथ टैगोर की एक प्रार्थना का स्मरण कराना चाहूंगा ताकि आप अपने कर्तव्यों के समक्ष आने वाली बाधाओं से विचलित न होते हुए उत्तराखण्ड को सही में देवभूमि का दर्जा दिला सकें -
जहां उड़ता फिरे मन बेखौफ
और सिर हो शान से उठा हुआ
जहां ज्ञान हो सबसे लिए बेरोकटोक बिना शर्त रखा हुआ
जहां घर की चैखट सी छोटी सरहदों में न बंटा हो जहां
जहां सच की गहराइयों से निकले हर बयान
जहां बाजुएं बिना थके लकीरें कुछ मुकम्मल तलाशें
जहां सही सोच को धुंधला न पाएं उदास मुर्दा रवायते
जहां दिलो दिमाग तलाशे नए ख्याल और उन्हें अंजाम दें
ऐसी आजादी के स्वर्ग में, हे भगवान, मेरे वतन की हो नई सुबह।
समस्त शुभकामनाओं सहित
आपका
[5:36 PM, 3/31/2017] +91 94129 09980: My comment on the above is as below :
[5:36 PM, 3/31/2017] +91 94129 09980: DN Barola Apoorva Joshi : आपका मूल्यांकन पूर्णतया सही है ! एकला चलो – खाता न बही जो हरीश रावत कहे वही सही की नीति भी एक महत्वपूर्ण कारक थी ! मैं पत्रों के द्वारा उन्हें चेताता रहा ! उनका जनसंपर्क टूट रहा था तब मैंने उन्हें जुलाई 2016 में पत्र लिखा था – ... . Sir if you allow me I would like to take the liberty to say that in spite of your best efforts at times you become ‘a lone man in the crowd’. On many occasions you are surrounded by people in en-mass where you seem to be accessible to everyone and at the same time to none.... परंतु मुख्य मंत्री जी किसी की नहीं सुन रहे थे ! रही सही कसर सत्ता विरोधी लहर ने पूरी कर दी ! पर नए मुख्य मंत्री जी इस सब से सबक लेकर अपना कार्य ईमानदारी व लगन से करेंगे तो उन्हें अवश्य सफलता मिलेगी ! ऐसा मेरा सोचना है ! क्रमशः ....
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DN Barola
DN Barola Apoorva Joshi : मैंने किशोर उपाध्याय जी से उनकी मतभेदों के विषय में भी लिखा था और उनसे अनुरोध किया था कि उन्हें चुनाव में अपनी सीट चुनने का अधिकार दिया जाना संगठन के हित मैं होगा ! पत्र के कुछ आवश्यकीय अंश इस प्रकार हैं !
“I am grieved Mr. Chief Minister, I am grieved!
Yes Mr. Chief Minister, I am talking about the unnecessary differences between you and Sri Kishore Upadhyaya. I am worried because this is taking place at a time when the elections are so near! I had a talk with Sri Kishore Upadhyaya yesterday. While you had posted me as Congress Election-in-charge Uttarakhand in 2000, I had the privilege of having the association of almost all senior or junior leaders. Mr. Kishore was your bosom friend and today things are tearing apart so far that this has become a matter of media. May be for a towering Chief Minister with massive support of the masses and the High Command, it will be possible for you to tackle this issue at your leisure. But to me the only point for consideration is why delay it? Delay in politics sometimes is dangerous. Why not nip the problem in the bud. Sir, with your multifarious skill, efforts and great art of oratory you have already survived the greatest onslaught from your rival cabinet Colleagues strongly aided by the Bharatiy Janata Party. But you must remember scars take time to heal! I had elsewhere also written that the Congress President must have the right to choose a seat for himself in the election. I had further written that at the risk of being misunderstood as a villain, I would dare state that with the elections so near, you must think about bringing the concept of collective leadership in the Cabinet which would bring harmony and respect of the colleagues for you. It is also important that you take out 2-3 minutes time for people like me so that we may tell you where the things are becoming pinching.
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Sunil Negi
Sunil Negi Well articulated


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